Thursday, June 11th, 2026

सपा सरकार में ठहरे निवेश, औद्योगिक विकास और रोजगार को मुख्यमंत्री योगी ने दी रफ्तार

लखनऊ

कभी निवेशकों की प्राथमिकता सूची में पीछे रहने वाला उत्तर प्रदेश आज देश की सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था में शामिल हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले 9 वर्षों में प्रदेश ने औद्योगिक विकास, निवेश, बुनियादी ढांचे और रोजगार सृजन के क्षेत्र में बड़े स्तर पर उपलब्धियां हासिल की हैं। केंद्र व राज्य सरकार के अभूतपूर्व तालमेल ने विकास की कई अहम पहलों के जरिए यूपी को वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की ओर तेजी से अग्रसर किया है।

सपा सरकार में उपेक्षित, योगी सरकार में रिकॉर्ड निवेश

2017 से पहले सपा सरकार के दौरान उत्तर प्रदेश में निवेश की गति लगभग ठहर सी गई थी। कानून-व्यवस्था, बुनियादी ढांचे और निवेश-अनुकूल माहौल की कमी को निवेशकों की बड़ी चिंता माना जाता था, लेकिन 2017 के बाद स्थिति तेजी से बदली।
पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश को 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन निवेश प्रस्तावों से लगभग 1.10 करोड़ रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है। ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी (जीबीसी) के चार चरणों में 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रोजेक्ट धरातल पर उतारे जा चुके हैं, जिनसे लगभग 60 लाख रोजगार अवसर पैदा हुए हैं। वहीं 7.5 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट के साथ 5वीं जीबीसी प्रस्तावित है। पिछली सपा सरकार के मुकाबले यह बदलाव दर्शाता है कि निवेशकों का विश्वास उत्तर प्रदेश में पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत हुआ है।
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत जटिल प्रक्रियाओं के अनुपालन में कमी लाने के लिए यूपी को भारत में प्रथम स्थान मिला है। 65 विभागों में प्रक्रियागत 4,675 अनुपालन कम किए गए है। व्यापार में सुगमता को बढ़ावा देने के लिए 13 राज्य अधिनियमों में लगभग 99 प्रतिशत छोटे दंडात्मक प्रावधानों को हटाया गया है।

एक्सप्रेसवे क्रांति से औद्योगिक विकास में तेजी

उत्तर प्रदेश की औद्योगिक सफलता के पीछे सबसे बड़ा आधार मजबूत बुनियादी ढांचा है। 2017 तक प्रदेश में सीमित एक्सप्रेसवे नेटवर्क था, जिनकी संख्या महज दो थी। वहीं आज उत्तर प्रदेश 22 एक्सप्रेसवे वाले राज्य के रूप में विकसित हो रहा है। फिलहाल यूपी में 9 एक्सप्रेसवे संचालित, 3 निर्माणाधीन और 10 प्रस्तावित हैं। देश के कुल एक्सप्रेसवे नेटवर्क का लगभग 55 प्रतिशत हिस्सा अकेले उत्तर प्रदेश में विकसित हो रहा है।
एक्सप्रेसवे के किनारे 26 जिलों में 27 स्थानों पर 5,300 हेक्टेयर भूमि औद्योगिक विकास के लिए चिन्हित की गई है। बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीआईडीए) के माध्यम से 56,662 एकड़ क्षेत्र में नया औद्योगिक शहर विकसित किया जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में औद्योगिक विकास का बड़ा केंद्र बनेगा।

जल-थल-आकाश: हर तरफ खुले रास्ते

वर्ष 2017 से पहले यूपी में केवल दो हवाई अड्डे (लखनऊ, वाराणसी) पूरी तरह और गोरखपुर हवाई अड्डा आंशिक रूप से क्रियाशील था। मोदी सरकार के मार्गदर्शन में योगी सरकार ने 9 वर्षों में इस क्षेत्र में तेजी से विकास किया। नतीजा यह कि प्रदेश में 17 हवाई अड्डे वर्तमान में चालू हैं और 7 अन्य हवाई अड्डों का विकास जारी है। नोएडा (जेवर) अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के संचालन के साथ ही यूपी 5 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों वाला पहला राज्य बन गया।
माल ढुलाई के लिए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) के तहत पूर्वी फ्रेट कॉरिडोर का 1,050 किमी से अधिक हिस्सा यूपी से गुजरता है। पूर्वी और पश्चिमी डीएफसी का जंक्शन दादरी में स्थित है। भारत के 111 राष्ट्रीय जलमार्गों में से 11 यूपी में हैं। भारत का पहला मल्टी-मॉडल टर्मिनल और फ्रेट विलेज (100 एकड़ से अधिक) वाराणसी में निर्माणाधीन है।

एफडीआई, फैक्ट्रियों और निर्यात में ऐतिहासिक वृद्धि

औद्योगिक विकास का सबसे बड़ा संकेतक विदेशी निवेश, फैक्ट्रियों की संख्या और निर्यात होता है। इन तीनों क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति की है। जून 2000 से मार्च 2017 तक प्रदेश में मात्र 3,303 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आया था। जबकि अप्रैल 2017 से जून 2025 के बीच यह आंकड़ा बढ़कर 17,004 करोड़ रुपये तक पहुंच गया और इसमें लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। योगी सरकार के कुशल नेतृत्व में इसमें पांच गुना से अधिक वृद्धि हुई है।
इसी तरह फैक्ट्रीज एक्ट 1948 के तहत पंजीकृत फैक्ट्रियों की संख्या सपा सरकार में 2016-17 में 14,169 थी, जो फरवरी 2026 तक बढ़कर 31,459 हो गई। यानी प्रदेश में औद्योगिक इकाइयों की संख्या दोगुने से अधिक हुई। निर्यात के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला। 2016-17 में प्रदेश का कुल निर्यात 86 हजार करोड़ रुपये था, जो फिलहाल दो लाख करोड़ से आगे निकल चुका है। आईटी और आईटीईएस निर्यात में और भी अधिक वृद्धि हुई है। यह 2015 के 15 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 82 हजार करोड़ का आंकड़ा पार कर चुका है। इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात भी 7 वर्षों में लगभग 1,058 प्रतिशत बढ़ा है। यह 3,862 करोड़ (2017-18) से बढ़कर 44,744 करोड़ (2024-25) हो चुका है।

एमएसएमई व ओडीओपी बने गेमचेंजर

योगी सरकार की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में एक एमएसएमई क्षेत्र को मजबूत बनाना है। वर्तमान में प्रदेश के एमएसएमई क्षेत्र में 3.11 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार प्राप्त हो रहा है। वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) योजना ने स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है। योजना के तहत 20,396 उद्यमियों को 903.63 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी गई, जिससे सवा तीन लाख से अधिक रोजगार अवसर सृजित हुए। कारीगरों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए 8,435 लाभार्थियों को 80.48 करोड़ रुपये की सहायता दी गई। इसके साथ ही 24 जिलों में 30 कॉमन फैसिलिटी सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। साथ ही विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के माध्यम से सवा चार लाख से अधिक लोगों को प्रशिक्षण और आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। प्लेज योजना के तहत 12 औद्योगिक पार्कों (10 से 50 एकड़) के विकास पर भी काम चल रहा है।

रक्षा, सेमीकंडक्टर और डेटा सेंटर में नई पहचान

पहले उत्तर प्रदेश को मुख्य रूप से कृषि प्रधान राज्य माना जाता था, लेकिन गुजरे 9 वर्षों में यूपी हाई-टेक उद्योगों का केंद्र बनकर उभरा है। रक्षा औद्योगिक गलियारे के 6 नोड झांसी, चित्रकूट, लखनऊ, अलीगढ़, आगरा और कानपुर विकसित किए जा रहे हैं। इस क्षेत्र में अब तक करीब दो सौ एमओयू पर हस्ताक्षर हो चुके हैं, जिनमें लगभग 35 हजार करोड़ रुपये के निवेश और लगभग 55 हजार से अधिक रोजगार सृजित होने की संभावना है।
यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में उत्तर भारत की पहली सेमीकंडक्टर यूनिट स्थापित की जा रही है। एचसीएल और फॉक्सकॉन का यह संयुक्त उपक्रम 3,700 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश करेगा। प्रदेश में डेटा सेंटर उद्योग भी तेजी से विकसित हो रहा है। 30 हजार करोड़ रुपये के निवेश से आठ डेटा सेंटर पार्क स्थापित किए जा रहे हैं। वर्ष 2030 तक 5 गीगावाट क्षमता और 2047 तक 40 गीगावाट क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।

वैश्विक मंच पर बढ़ी यूपी की साख

योगी सरकार ने निवेश आकर्षित करने के लिए वैश्विक स्तर पर भी सक्रिय प्रयास किए हैं। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2026 के दौरान एआई, डेटा सेंटर और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में 2.94 लाख करोड़ रुपये के एमओयू हुए। सिंगापुर और जापान यात्राओं के दौरान 1.5 लाख करोड़ रुपये के एमओयू प्राप्त हुए और 2.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले, जिनसे लगभग 5 लाख रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है। यह दर्शाता है कि उत्तर प्रदेश अब वैश्विक निवेशकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन चुका है।

 

#Under PM Modi's

Source : Agency

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