Thursday, June 4th, 2026

एमपी हाईकोर्ट ने दी टिप्पणी, न्याय के लिए शक्ति का इस्तेमाल होना चाहिए

जबलपुर
आपसी समझौता का आवेदन निरस्त ट्रायल कोर्ट द्वारा निरस्त किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। हाईकोर्ट जस्टिस बी पी शर्मा की एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि कानून के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल बहुत सावधानी से किया जाना चाहिए। जिससे कोर्ट प्रोसेस का गलत इस्तेमाल नहीं किया जा सके और न्याय का मकसद पूरा हो सके। अपराधों की प्रकृति और गंभीरता से समाज पर पड़ने वाले गंभीर असर को देखते हुए अपील को खारिज किया जाता है।

इंदौर निवासी ने लगाई थी याचिका
इंदौर निवासी रोशन खातरकर की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि भोपाल के मिसरोद थाने में शिकायतकर्ता शाहरुख खान ने उसके और सह अभियुक्त के खिलाफ पिस्टल की नोंक पर कार और मोबाइल लूटने की शिकायत दर्ज करवाई थी। दोनों पक्षों में पहले ही विवाद सुलझ गया है और उन्होंने धारा 320(2) के तहत ट्रायल कोर्ट ने आपसी समझौते के लिए आवेदन दिया था। ट्रायल कोर्ट ने अपराध कंपाउंडेबल नहीं होने के आधार पर आवेदन को खारिज कर दिया था।

अंदरूनी शक्तियां हैं बड़ी
एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि हाई कोर्ट की अंदरूनी शक्तियां बहुत बड़ी हैं। उनका मकसद न्याय का सही प्रशासन कायम रखना है। न्याय में होने वाली गलतियों को ठीक करना है। कोई अपराध कंपाउंडेबल नहीं है, इस आधार पर हाईकोर्ट अपनी शक्ति का इस्तेमाल करने से इनकार नहीं कर सकता है। शक्ति का इस्तेमाल उन मामलों में किया जा सकता है, जहां आरोपी के खिलाफ सजा दर्ज होने की कोई संभावना नहीं है और ट्रायल की पूरी प्रक्रिया बेकार साबित होने वाली है। शक्तियों का इस्तेमाल बहुत कम और सिर्फ उन मामलों में किया जाना चाहिए, जिसमें अभियोजन जारी रखना कानून प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल होगा। प्रकरण में दोनों पक्षों में आपस में लगे हुए प्लॉट के कारण सिविल विवाद की शुरुआत हुई थी। अपराध की प्रकृति और गंभीरता को देखते हुए याचिका को निरस्त किया जाता है।

 

 

#high court

Source : Agency

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