Thursday, July 23rd, 2026
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IAS का 'अंडरकवर ऑपरेशन'... प्रिंट रेट से ज्यादा कीमत पर बिकती शराब पकड़ी

जबलपुर

जबलपुर में एक अनोखे 'अंडरकवर ऑपरेशन' ने शराब कारोबारियों और आबकारी विभाग की पोल खोल दी है. कलेक्टर के निर्देश पर स्थानीय एसडीएम ने एक टीम गठित कर शराब की दुकानों पर तय कीमत से अधिक दरों पर बिक्री के खेल का खुलासा किया है.

मध्यप्रदेश में बीते कई दिनों से एमआरपी (MRP) से ज्यादा रेट पर शराब दुकानों से शराब बिक्री की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसी ही बहुत सी शिकायतें जब जबलपुर कलेक्टर के पास पहुंची तो उन्होंने ओवर रेटिंग पर शराब बेचने वाले कारोबारियों को बेनकाब करने के लिए स्टिंग ऑपरेशन कराए। कलेक्टर के इस स्टिंग ऑपरेशन में शहर की अधिकतर शराब दुकानों पर ज्यादा रेट में शराब बिकती मिली है जिसके प्रमाण भी जुटाए गए हैं।

कलेक्टर ने कराया स्टिंग..
एमआरपी से ज्यादा रेट पर शराब बेचे जाने की लगातार शिकायतें मिलने के बाद जबलपुर कलेक्टर दीपक कुमार सक्सेना ने राजस्व विभाग के कर्मचारियों को ग्राहक बनकर शहर की अलग अलग दुकानों की जांच करने भेजा। ग्राहक बनकर जब राजस्व विभाग के कर्मचारी शराब दुकानों पर पहुंचे और शराब खरीदी तो ओवर प्राइजिंग पर शराब बिकती मिली है। जांच के दौरान पता चला है कि अलग अलग दुकानों पर शराब के अलग अलग रेट हैं और 20 रूपये से लेकर 50 और 100 रुपये तक महंगी दर पर शराब बेची जा रही है।

22 में से 21 दुकानों पर मिली ओवर प्राइजिंग
कलेक्टर के निर्देश पर राजस्व विभाग के कर्मचारियों ने ग्राहक बनकर शहर की 22 कंपोजिट शराब दुकानों की जांच की है इन 22 में से 21 दुकानों पर ओवर प्राइजिंग पर शराब बेचे जा रही थी ऐसी जानकारी मिली है। दिलचस्प बात तो यह है कि ग्राहक बनकर शराब खरीदने गए सरकारी कर्मचारियों ने शराब खरीदने का पेमेंट ऑनलाइन किया है जिसके की पुख्ता सबूत भी उनके पास हैं। ग्राहकों से प्रिंट रेट से ज्यादा कीमत वसूलने वाली शराब दुकानों की जानकारी अब कलेक्टर तक पहुंच चुकी है।

जबलपुर में लंबे समय से शराब कारोबारियों पर ग्राहकों से अधिक कीमत वसूलने के आरोप लग रहे थे. इस 'अंडरकवर ऑपरेशन' से पता चला कि शराब की दुकानों पर 20 से 50 रुपए और कई बार 100 रुपए तक अधिक कीमत पर शराब बेची जा रही थी.

इस खेल का पर्दाफाश करने के लिए राजस्व निरीक्षकों और पटवारियों की टीमें बनाई गईं, जिन्हें ग्राहक बनाकर एक-एक दुकान पर भेजा गया. सबसे खास बात यह रही कि इन सरकारी कर्मचारियों ने शराब खरीदने के लिए सभी भुगतान ऑनलाइन किए. यानी, शराब की बोतलें खरीदकर गूगल पे या फोन पे जैसे यूपीआई के माध्यम से भुगतान किया गया.

हैरानी की बात यह है कि 22 में से 21 दुकानों पर अधिक कीमतों पर शराब बेचने का खुलासा हुआ. इसके बाद इन टीमों ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर एसडीएम को सौंपी, जिसमें प्रिंट रेट से अधिक कीमत पर शराब बेचने वाले कारोबारियों के खिलाफ मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम के तहत कार्रवाई की अनुशंसा की गई है. साथ ही, अधिक कीमत पर खरीदी गई शराब की बोतलें सबूत के तौर पर जमा कर ली गई हैं.

 

#MRP

Source : Agency

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