Saturday, June 6th, 2026

अमेज़न ई-कारीगर से जुड़ेंगे जनजातीय कलाकार

भोपाल 

पंचायत एवं ग्रामीण विकास और श्रम मंत्री  प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि गोंड चित्रकला हमारे जनजातीय समाज की एक प्राचीन और गौरवशाली कला है। बुधवार को डिंडौरी जिले के कलेक्ट्रेट ऑडिटोरियम में आयोजित 'अमेज़न ई-कारीगर' मंच के शुभारंभ और समझौता ज्ञापन (MoU) हस्ताक्षर समारोह को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही। इस अवसर पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्यमंत्री मती राधा सिंह सहित विभाग एवं जिले के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

वैश्विक पहचान और जीआई टैग पर जोर

मंत्री  पटेल ने कहा कि गोंडी कला आधारित उत्पादों को अमेज़न ई-कारीगर सहित विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध करने से इस कला को वैश्विक बाजार तक पहुंच मिलेगी। इससे न केवल चित्रकारों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य और सम्मान मिलेगा, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उनकी विशेष पहचान बनेगी। उन्होंने इस पुरातन और जीवंत कला को 'जीआई टैग' (GI Tag) दिलाने के लिए भी आवश्यक प्रयास करने की बात कही।

आर्थिक सशक्तिकरण और कला संरक्षण के लिए ऐतिहासिक कदम

गोंडी चित्रकला के प्रमुख केंद्र डिंडौरी के पाटनगढ़ ग्राम के कलाकारों के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। कार्यक्रम में "आजीविका ग्राम संगठन" पाटनगढ़ और "डॉट्स एंड डैशेज" संस्था के मध्य एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। ग्राम पाटनगढ़ के 157 परिवार प्रत्यक्ष रूप से इस कला से जुड़े हुए हैं, जिनमें 85 महिला और 72 पुरुष कलाकार शामिल हैं। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक गोंडी कला का संरक्षण, संवर्धन और बाजार का विस्तार करना है।

आय में 10 गुना वृद्धि और ग्रामीण उद्यमिता का लक्ष्य

यह समझौता कलाकारों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। 'डॉट्स एंड डैशेज' के व्यवस्थित विपणन सहयोग से वर्तमान में चित्रकार परिवारों की औसत वार्षिक आय 35 हजार रूपये से बढ़कर 70 हजार रूपये तक पहुंच गई है। अब उत्पादों को ऑनलाइन बिक्री मंचों पर उपलब्ध कराने से इनकी वैश्विक मांग बढ़ेगी, जिससे आगामी समय में कलाकारों की आय में 10 गुना तक वृद्धि होने की संभावना है। यह पहल डिंडौरी जिले में कला आधारित आजीविका का एक सफल उदाहरण स्थापित करेगी।

 

 

#Minister Patel

Source : Agency

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