Saturday, July 25th, 2026

मध्यप्रदेश में पेपर लीक केसों की होगी फास्ट ट्रैक सुनवाई, हाईकोर्ट ने 4 विशेष अदालतों का किया गठन

जबलपुर

मध्य प्रदेश में पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी के मामलों का अब तेजी से निपटारा होगा। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें गठित करने का आदेश जारी किया है। इन अदालतों में परीक्षा संबंधी अपराधो का जल्द होगी सुनवाई। हाईकोर्ट ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 8(3) के तहत मिली शक्तियों का उपयोग करते हुए यह नोटिफिकेशन जारी किया है। साथ ही राज्य के विधि विभाग को नई व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए हैं।

परीक्षा घोटाले पर MP हाई कोर्ट का बड़ा कदम

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने सार्वजनिक परीक्षाओं में प्रश्न पत्र लीक, छद्म रूप धारण (इम्पर्सोनेशन), अनुचित साधनों के उपयोग और अन्य परीक्षा संबंधी अनियमितताओं के मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए प्रदेश में चार विशेष फास्ट ट्रैक न्यायालय नामित किए हैं। 

​कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति विवेक रूसिया की पहल पर भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर और इंदौर में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीशों को विशेष फास्ट ट्रैक न्यायालय के रूप में नामित किया गया है। बता दें कि पेपर लीक पर सख्ती के लिए मध्य प्रदेश मान्यता प्राप्त परीक्षा अधिनियम में संशोधन करने को लेकर मोहन यादव सरकार सुर्खियों में रही।

हाई कोर्ट ने बनाए 4 विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट

    ​भोपाल: प्रवीण पटेल 18वे जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश
    ​ग्वालियर: विशाल अखंड 8वे जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश
    ​जबलपुर: आनंद कुमार सेहलाम 27 वे जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश
    ​इंदौर: डॉ. शुभ्रा सिंह 26 वे जिला एवं सत्र न्यायाधीश

3 माह के भीतर ट्रायल पूरा करने के निर्देश

​ये विशेष न्यायालय लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता, 2023 के अंतर्गत दर्ज संबंधित अपराधों तथा राज्य या केंद्र सरकार द्वारा संदर्भित जांच एजेंसियों की विवेचना वाले मामलों की सुनवाई करेंगे। हाई कोर्ट ने संबंधित प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को निर्देश दिए हैं कि चार्जशीट दाखिल होने की तिथि से तीन माह के भीतर विचारण (ट्रायल) पूरा कर निर्णय सुनाने का हरसंभव प्रयास किया जाए। ​हाई कोर्ट का मानना है कि इस त्वरित व्यवस्था से परीक्षा घोटालों से जुड़े मामलों में शीघ्र अभियोजन और न्याय सुनिश्चित होगा। इसके साथ ही संगठित परीक्षा धोखाधड़ी पर प्रभावी अंकुश लगेगा तथा सार्वजनिक परीक्षाओं व भर्ती प्रक्रियाओं की निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता के प्रति जनविश्वास मजबूत होगा।(अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम, 2024 के साथ भारतीय न्याय संहिता, 2023 के अंतर्गत दर्ज संबंधित अपराधों व राज्य या केंद्र सरकार द्वारा संदर्भित जांच एजेंसियों की विवेचना वाले मामलों की सुनवाई करेंगे।

हाईकोर्ट ने इन विशेष अदालतों को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) की शक्तियां भी प्रदान की हैं। इसका अर्थ यह है कि अदालतें केवल अंतिम सुनवाई ही नहीं करेंगी, बल्कि मामलों का संज्ञान लेने और शुरुआती न्यायिक प्रक्रिया को भी पूरा कर सकेंगी। इससे जांच एजेंसियों को भी सुविधा मिलेगी और मामलों में अनावश्यक देरी की संभावना कम होगी।

विशेष अदालतों का गठन चार प्रमुख शहरों—भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर—में किया गया है। ये चारों शहर प्रदेश के प्रमुख न्यायिक और प्रशासनिक केंद्र हैं, जहां बड़ी संख्या में भर्ती परीक्षाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मामले दर्ज होते हैं। ऐसे में इन शहरों में फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना से प्रदेशभर के मामलों का प्रभावी संचालन संभव होगा।

यह व्यवस्था केवल दोषियों को सजा दिलाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि भविष्य में पेपर लीक जैसे अपराधों पर रोक लगाने में भी मदद करेगी। जब मामलों का फैसला जल्दी होगा और दोषियों के खिलाफ समय पर कार्रवाई होगी, तो परीक्षा माफिया और अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों के लिए यह कड़ा संदेश साबित होगा।

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र लंबे समय से ऐसी व्यवस्था की मांग कर रहे थे, जिससे परीक्षा प्रक्रिया निष्पक्ष बनी रहे। कई बार पेपर लीक होने के कारण परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं, जिससे लाखों अभ्यर्थियों का समय और मेहनत दोनों प्रभावित हुए। नई अदालतों के गठन से छात्रों को उम्मीद है कि यदि भविष्य में किसी भी तरह की अनियमितता सामने आती है, तो उस पर त्वरित कानूनी कार्रवाई होगी।

राज्य सरकार पहले ही परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए कई तकनीकी और प्रशासनिक कदम उठा चुकी है। अब हाईकोर्ट के इस फैसले से न्यायिक प्रक्रिया भी मजबूत होगी। इससे जांच एजेंसियों, प्रशासन और न्यायपालिका के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होने की संभावना है।

नोटिफिकेशन में कहा गया,

"भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (2023 का नंबर 46) की धारा 8 की उप-धारा 3 के प्रावधानों और अन्य सभी संबंधित प्रावधानों के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, नीचे दी गई टेबल के कॉलम नंबर (2) में बताई गई जगहों पर कॉलम नंबर (3) में बताए गए ज़िला और एडिशनल सेशन जजों की अदालतों को - कॉलम नंबर (4) में बताए गए अधिकार क्षेत्र के लिए - 'पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) एक्ट, 2024' और 'भारतीय न्याय संहिता, 2023' के तहत बताए गए अपराधों और राज्य/केंद्र सरकार द्वारा भेजी गई एजेंसी की जांच वाले संबंधित मामलों की सुनवाई के लिए स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट के तौर पर तय करता है।"

इन मामलों को देखने के लिए जजों को 'ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास' की शक्तियां दी गईं।

इन मामलों की होगी सुनवाई
विशेष अदालतों में पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024, भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के तहत दर्ज अपराधों और राज्य या केंद्र सरकार की अधिकृत जांच एजेंसियों द्वारा जांचे जा रहे परीक्षा संबंधी मामलों की सुनवाई होगी।

JMFC की शक्तियां भी दी गईं
हाईकोर्ट ने इन विशेष अदालतों को मामलों का संज्ञान लेने और शुरुआती न्यायिक प्रक्रिया पूरी करने के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) की शक्तियां भी प्रदान की हैं। इससे मामलों की सुनवाई में तेजी आने की उम्मीद है।

 

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Source : Agency

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