रायपुर : छत्तीसगढ़ में पान की खेती की संभावनाओं पर दो दिवसीय कृषक प्रशिक्षण संपन्न : राज्य में साढ़े तीन सौ से अधिक किसान कर रहे हैं पान की खेती

रायपुर : छत्तीसगढ़ में पान की खेती की संभावनाओं पर दो दिवसीय कृषक प्रशिक्षण संपन्न : राज्य में साढ़े तीन सौ से अधिक किसान कर रहे हैं पान की खेती

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के पादप कार्यिकी विभाग छत्तीसगढ़ में पान की खेती की संभावनाएं द्वारा ‘‘छत्तीसगढ़ में पान की खेती की संभावनाएं’’ विषय पर दो दिवसीय कृषक प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें छत्तीसगढ़, बिहार एवं झारखंड राज्य के 75 किसान शामिल हुए थे। प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के निदेशक विस्तार डॉ. एस.सी. मुखर्जी द्वारा किया गया। उन्होंने झारखंड, बिहार एवं छत्तीसगढ़ से आये पान उत्पादक किसानों से चर्चा की एवं छत्तीसगढ़ में पान के उत्पादन की बढ़ती संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर में राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत संचालित पान परियोजना के तहत आयोजित किया गया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रथम दिन परियोजना अन्वेषक डॉ. एलिस तिर्की एवं उनके सहयोगी डॉ. अंबिका टंडन एवं टी. तिर्की ने पान की खेती की विस्तृत जानकारी सभी पहलुओं में दी गई। बरेजा की नेट हाऊस में पान की खेती करने की सलाह दी गई साथ ही अतिरिक्त आय लेने के लिए ओस्टर मशरूम तथा पान की छोटे एवं सड़े, धब्बे, पत्तों से तेल निकालने में उपयोग किया जा सकता हैं इसका प्रदर्शन किया गया। पान में जैविक प्रबंधन की जानकारी भी दी गयी। अंतिम दिन प्रक्षेत्र भ्रमण कराया गया तथा कंटिग के माध्यम से पौध तैयार करने की तकनीक सिखाई गई। कृषि महाविद्यालय में उगाई जा रही पान की 15 प्रजातियों के औषधीय गुण, पोषक तत्व तथा उपज की जानकारी दी गई। किसानों को पान की नई प्रजातियों जैसे कारापाकु, बाईचीगुड़ी, मघई आदि को लगाने की सलाह दी गई।

उल्लेखनीय है कि पान परियोजना के अंतर्गत विश्वविद्यालय में किए गए अनुसंधान के परिणामों को  विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा पान उत्पादक क्षेत्र में जाकर किसानों को प्रशिक्षण एव प्रदर्शन के माध्यम से पान उत्पादन के लिए प्रेरित किया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान अनेक कृषकों ने पान उत्पादन करने पर सहमति जताई। कुछ कृषकों ने व्यवसायिक रूप से पान की खेती शुरू भी कर दी है। इस परियोजना के माध्यम से अब तक कुल 375 कृषक लाभान्वित हो चुके हैं। प्रक्षेत्र भ्रमण के दौरान अधिष्ठाता डॉ. एस.एस. राव ने कृषकों का हौसला बढ़या। प्रशिक्षण के समापन में डॉ. आरती गुहे, डॉ. एस.एस. टुटेजा, डॉ. ए.के. गेड़ा, डॉ. एलिस तिर्की, डॉ. अंबिका टंडन एवं डॉ. टी. तिर्की उपस्थित थीं।