रायपुर : सुपोषण अभियान की एक और कामयाबी, नन्हे दादू हुए पोषित चेहरे की रौनक और मुस्कान लौटने लगी

रायपुर : सुपोषण अभियान की एक और कामयाबी, नन्हे दादू हुए पोषित चेहरे की रौनक और मुस्कान लौटने लगी

रायपुर. सुपोषण अभियान से अब बच्चों के चेहरे की रौनक और मुस्कान लौटने लगी है। हसते खिलखिलाते इन्ही नन्हे बच्चों में रायपुर जिले के ग्राम पलौद का बालक यादराम भी शामिल हो गया है। कुपोषण को हराकर अब उसने सुपोषण की ओर अपना कदम बढ़ा लिया है। नया रायपुर क्षेत्र के ग्राम पलौद निवासी श्री उमाकांत पटेल और श्रीमती उर्मिला पटेल का बेटा यादराम जिसे घर में सभी प्यार से दादू बुलाते थे,जन्म के समय ठीक था,लेकिन उचित पोषण न मिलने से 4-5 महीने में ही गंभीर रूप से कुपोषित हो गया। श्रीमती उर्मिला ने बताया कि दादू उनका पहला बच्चा है।

मां का दूध कम आने और ठीक से खाना न खाने के कारण बच्चा बहुत कमजोर हो गया था। बच्चे यादराम के जन्म के बाद सेक्टर पर्यवेक्षक सुश्री आशा पात्रे उनके घर गृह भेंट के लिए गई। बच्चे को देखने और उसका वजन लेने पर पता चला कि बच्चा गंभीर रूप से कुपोषित है। दादू के परिवार ने बताया कि वह बार-बार बीमार पड़ता है, खेलने में रूचि नहीं लेता, उसकी त्वचा भी रूखी सी रहती है। इसलिए उसे चिन्हांकित कर सेक्टर पर्यवेक्षक ने अपनी निगरानी में ले लिया।

सुश्री पात्रे ने बताया कि 2 अक्टूबर गांधी जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने कुपोषण से मुक्ति का संकल्प लेकर ‘मुख्यमंत्री सुपोषण योजना‘ की शुरूआत की। अभियान के तहत शून्य से 5 साल तक के चिन्हित बच्चों को सुपोषित करने के लिए विशेष अभियान चलाया गया। गंभीर रूप से कुपोषित दादू को भी इस योजना में शामिल किया गया। दादू को सुपोषित श्रेणी में लाना एक चुनौती थी क्योंकि शुरूआत में बच्चे की खाने में रूचि नहीं थी और उसकी मां भी रोज आंगनबाड़ी केन्द्र नही आती थी। सुश्री पात्रे ने बताया कि महिला एवं बाल विकास विभाग के संचालक श्री जन्मेजय महोबे ने स्वयं आंगनबाड़ी केन्द्र आकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और बच्चों को सुपोषित श्रेणी में लाने के लिए मन लगाकर मेहनत करने के निर्देश दिए।

दादू को सुपोषित करने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती अनिता पटेल ने पूरी मेहनत व लगन से कार्य किया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता यादराम के घर जाकर उसे रोज सुबह के नाश्ता में एक केला, 2 बिस्कुट, 100 ग्राम दूध का एक पैकेट देने लगी। दोपहर में मां व बच्चे को आंगनबाड़ी केन्द्र में भोजन व माता को चिकी का पैकेट तथा शाम के नाश्ते में पौष्टिक लड्डू दिया गया। परिवार को सुपोषण का महत्व समझााने और लगातार प्रयास से स्थिति में परिवर्तन आना शुरू हो गया। धीरे-धीरे बच्चे का कार्यकर्ता से स्नेह भी बढ़ने लगा वह खुद ही कार्यकर्ता के आने का इंतजार करता और अपनी मां से कहता ‘मुझे जल्दी तैयार करो मेरी मैडम आती ही होगी‘। दादू का वजन बढ़ने लगा, तब पूरे परिवार ने भी रूचि दिखाई।

धीरे-धीरे बच्चा गंभीर से मध्यम कुपोषित श्रेणी में आ गया। मौसम की खराबी व ठंड में दादू की तबीयत खराब हुई तब कार्यकर्ता ने उसकी उचित स्वास्थ्य जांच और देखभाल की इससे उसका वजन नहीं घटा। अब दादू मध्यम कुपोषित से सामान्य की श्रेणी में आ गया है,इसकी खुशी दादू के पूरे परिवार के साथ आंगनबाड़ी के पूरे स्टॉफ को भी है। अब दादू बीमार नहीं पड़ता, सुस्त नहीं रहता । दादू हंसता-खेलता है, उसकी त्वचा में रूखेपन की जगह चमक आ गई है। दादू की मां का कहना है मुख्यमंत्री सुपोषण योजना उनके बच्चे के लिए वरदान साबित हुई है।