छत्तीसगढ़ का गोधन न्याय योजना नई दिल्ली के राजपथ पर बिखेरेगी अपनी सफलता के रंग

छत्तीसगढ़ का गोधन न्याय योजना नई दिल्ली के राजपथ पर बिखेरेगी अपनी सफलता के रंग

रायपुर (राज्य ब्यूरो)। छत्तीसगढ़ की गोधन न्याय योजना गणतंत्र दिवस के मौके पर नई दिल्ली के राजपथ पर होने वाले मुख्य समारोह की शान बनेगा। रक्षा मंत्रालय की उधास्तरीय विशेषज्ञ समिति ने गोधन न्याय योजना पर बनी राज्य की झांकी को हरी झंडी दे दी है। दो माह से नई दिल्ली में चल रही चयन प्रक्रिया के बाद छत्तीसगढ़ ने यह उपलब्धि हासिल की है। सीएम भूपेश बघेल ने इस जानकारी को ट्वीट कर शेयर भी किया है। सीएम ने ट्विटर पर लिखा है कि अब हमारी अनूठी गोधन न्याय योजना की सफ़लता का साक्षी पूरा देश बनेगा।


उन्होंने बताया कि इस बार मात्र 12 राज्यों को ही राजपथ पर अपने राज्य की झांकी के प्रदर्शन का अवसर मिला है, जबकि दावा सभी राज्यों ने किया था। बता दें कि गोधन न्याय योजना मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सफल और महत्वाकांक्षी योजना है। संसद की स्थायी समिति इस योजना को पूरे देश में लागू करने की अनुशंसा कर चुकी है। राज्य की इस झांकी ग्रामीण संसाधनों के उपयोग के पारंपरिक ज्ञान और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के समन्वय से एक साथ अनेक वैश्विक चिंताओं के समाधानों के लिए विकल्प प्रस्तुत करेगी।

झांकी के पहले हिस्से में महिला स्वावलंबन की झलक

झांकी के पहले हिस्से में गाय के गोबर को इकट्ठा करके उन्हें विक्रय के लिए गोठानों के संग्रहण केंद्रों की ओर ले जाती ग्रामीण महिलाओं को दर्शाया जाएगा। ये महिलाएं पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा में होंगी, जो हाथों से बने कपड़े और गहने पहने हुए होंगी। इन्हीं में से एक महिला को गोबर से उत्पाद तैयार कर विक्रय के लिए बाजार ले जाते दिखाया जाएगा। महिलाओं के चारों ओर फूलों के गमलों की सजावट की जाएगी, जो गोठानों में साग-सब्जियों और फूलों की खेती के प्रतीक होंगे। नीचे की ओर गोबर से बने दीयों की सजावट की जाएगी। ये दीये ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आए स्वावलंबन और आत्मविश्वास को प्रदर्शित करेंगे।

दिखेगा रूरल इंडस्ट्रीयल पार्क

झांकी के पिछले हिस्से में गोठानों को रूरल इंडस्ट्रीयल पार्क के रूप में विकसित होते दिखाया जाएगा। इसमें दिखाया जाएगा कि नई तकनीकों और मशीनों का उपयोग करके महिलाएं किस तरह स्वयं की उद्यमिता का विकास कर रही हैं। गांवों में छोटे-छोटे उद्योग संचालित कर रही हैं। मध्य भाग में दिखाया जाएगा कि गाय को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के केंद्र में रखकर किस तरह पर्यावरण संरक्षण, जैविक खेती, पोषण, रोजगार और आय में बढ़ोतरी के लक्ष्यों को हासिल किया जा रहा है। सबसे आखिर में चित्रकारी करती हुई ग्रामीण महिला को राज्य के पारंपरिक शिल्प और कलाओं के विकास की प्रतीक के रूप में प्रदर्शित किया जाएगा।

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