25 जवानों की हत्या में शामिल नक्सली का सरेंडर : 13 और माओवादियों ने छोड़े हथियार, एक लाख रुपए का इनामी भी पकड़ा गया

25 जवानों की हत्या में शामिल नक्सली का सरेंडर : 13 और माओवादियों ने छोड़े हथियार, एक लाख रुपए का इनामी भी पकड़ा गया

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में पुलिस के लोन वर्राटू यानी घर वापस आइए अभियान से प्रभावित होकर 14 नक्सलियों ने सरेंडर किया है। इनमें से एक नक्सली 25 जवानों की हत्या में भी शामिल रहा है। सर्चिंग पर निकले DRG के जवानों ने 1 इनामी नक्सली को भी गिरफ्तार किया है। ये सभी माओवादी पिछले कई सालों से माओवाद संगठन से जुड़कर काम कर रहे थे। साथ ही कई घटनाओं में भी शामिल रहे हैं।

SP डॉ. अभिषेक पल्लव ने बताया कि इनके समर्पण करने से अब इलाका शांत होगा। इधर, लोन वर्राटू अभियान से प्रभावित होकर पिछले डेढ़ साल में 454 नक्सली मुख्यधारा में लौट आए हैं।

सरेंडर करने वाले नक्सलियों में 1 लाख रुपए का इनामी नक्सली सन्ना मरकाम भी शामिल है। यह नक्सलियों के डूमाम लोकल ऑब्जर्वेशन स्क्वायड (LOS) का सदस्य है। सन्ना साल 2017 में सुकमा जिला के बुरकापाल में हुई पुलिस नक्सली मुठभेड़ में भी शामिल था। इस घटना में 25 जवान शहीद हुए थे।

सन्ना ने पुलिस को बताया कि वह माओवादियों की खोखली विचारधारा से तंग आ गया था। सरेंडर कर खुशहाल जिंदगी जीना चाहता था, इसलिए आत्मसमर्पण किया है। अन्य 13 नक्सलियों ने भी हिंसा का रास्ता छोड़ दिया है और सन्ना के साथ आकर उन्होंने भी आत्मसमर्पण किया है।

दंतेवाड़ा के एसपी डॉ. अभिषेक पल्लव ने बताया कि आत्मसमर्पण किए अन्य 13 माओवादी हत्या, लूट, आगजनी, बड़े नक्सली लीडरों की बैठक की व्यवस्था करना, उनके लिए खाने की व्यवस्था करना, बैनर पोस्टर लगाना, सड़क, पुल पुलिया को क्षतिग्रस्त करना सहित अन्य काम किया करते थे। ये माओवादी कई बड़े लीडरों के साथ काम कर चुके हैं। ऐसे में यह सभी पुलिस के सामने कई राज खोलेंगे।

दंतेवाड़ा के कटेकल्याण थाना क्षेत्र से जवानों ने 1 लाख रुपए के इनामी माओवादी कोसा मड़कम को भी गिरफ्तार किया है। कोसा नक्सलियों के DAKMS अध्यक्ष के पद पर काम कर रहा था। शनिवार को कटेकल्याण थाना बल व दंतेवाड़ा के DRG जवानों की टुकड़ी जिले के सुरनार और टेटम के जंगलों में सर्चिंग के लिए निकली हुई थी। इस दौरान जंगल में पुलिस पार्टी को देख एक संदिग्ध व्यक्ति भाग रहा था। जिसे घेराबंदी कर पकड़ा गया। जिसकी पहचान कोसा के रूप में हुई। यह पिछले कई सालों से कटेकल्याण एरिया कमेटी में सक्रिय रहकर तांडव मचा रहा था।