वार्ता विशेष : लंपी वायरस से घबराये नहीं, गायो का उपचार एवं सेवा करे – डॉक्टर के के पटेल

वार्ता विशेष : लंपी वायरस से घबराये नहीं, गायो का उपचार एवं सेवा करे – डॉक्टर के के पटेल

राजिम (गरियाबंद जिला) के पशुपालन विभाग द्वारा संचालित पशु उपचार केंद्र के वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉक्टर श्री किशोर कुमार पटेल ने लंपी वायरस के उपचार एवं रोकथाम पर हमारे वरिष्ठ पत्रकर बिशेष दुदानी से महत्वपूर्ण जानकारियाँ साझा की है।

डॉक्टर पटेल का कहना है कि लम्पी वायरस एक चर्म (स्किन) रोग है जो आजकल गायों एवं मवेशीयो को संक्रमित कर रहा है। छत्तीसगढ़ में वर्ष 2020 में लम्पी वायरस के पहले मामले ओडिशा बॉर्डर के समीप कुछ गाँव की गायों एवं मवेशियों में पाया गया था।

लंपी वायरस के संक्रमण में गाय को शुरु में तेज़ बुखार आता फिर बदन पर दाने दाने जैसे लम्प्स निकल आते है और पैर भी सूज जाते है। गाय को बेचैनी होने लगती है वे आहार एवं दूध देना भी बंद कर देती है।

वर्ष 2020 कोरोना लॉकडाउन के दौरान छत्तीसगढ़ की पशुपालन विभाग की टीम ने शीघ्रता दिखते हुए फ़ौरन लंपी वायरस से संक्रमित गायो और मवेशियों का उपचार किया था, फलस्वरूप छत्तीसगढ़ की गायों और मवेशियों में हेर्ड इम्युनिटी बन चुकी है एवं 300 टिक्के राजिम (गरियाबंद) की गायो को लगाए गए है। भविष्य में प्रशासन की अच्छी संख्या में मवेशीयो को और टिक्के लगाने की योजना है।

लंपी वायरस का अगर वक्त रहते बेहतर इलाज हो जाये तो गाये दो दिन से एक हफ्ते के भीतर तक स्वस्थ्य हो जाती है। पशुपालन विभाग छत्तीसगढ़ द्वारा लम्पी वायरस के प्रति सजगता दिखाई गयी है, गांव गांव में विशेष कैंप लगा कर मवेशियों को गोट पॉक्स के टिक्के दिए जा रहे है और संक्रमित गायों को अलग रखने के भी दिशा निर्देश जारी कर दिए गए है।

अन्य प्रदेश जैसे राजस्थान, हरियाणा में हो रही गायो की मौतों पर डॉक्टर पटेल का कहना है कि वहां की गाय की नस्ल, वातावरण मौसम छत्तीसगढ़ से भिन्न है, इसलिए कुछ गायो की मौत हो रही है। वक्त रहते अगर संक्रमित गायो को बेहतर उपचार और सेवा मिले तो मौत के आंकड़ों को कुछ कम किया जा सकता है।

– बिशेष दुदानी

इस्पात टाइम्स रायपुर के २४ सितंबर पेज ना ३ में ये लेख वार्ता छपी है। कृपया पढ़ने के लिए क्लिक करे

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