छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेश भाजपा पर सवाल उठाये, अर्णव के वॉट्सएप चैट की जांच की मांग

छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेश भाजपा पर सवाल उठाये, अर्णव के वॉट्सएप चैट की जांच की मांग

केंद्र सरकार के कृषि संबंधी कानूनों के विरोध में दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे किसान आंदोलन से जुड़े नेताओं को नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) के नोटिस से केंद्र सरकार पर राजनीतिक हमला तेज हो गया है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि जब भी कहीं विरोध होता है भाजपा उसे बदनाम करने की कोशिश करती है। लेकिन इस बार सामने किसान हैं, वे डरेंगे नहीं।

मुख्यमंत्री निवास में संवाददाताओं से चर्चा में CM भूपेश बघेल ने कहा कि किसानों ने विरोध किया तो BJP ने उन्हें कभी पाकिस्तानी कहा और कभी खालिस्तानी। BJP नेताओं ने यहां तक आरोप लगाया कि किसान बिचौलियों के दलाल हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा, किसानों को दबाने के BJP के तमाम प्रयासों के बावजूद, किसान न डरेंगे, न दबेंगे और न पीछे हटेंगे।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल शुरुआत से ही तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ मुखर रहे हैं। कानून के लिए अध्यादेश लाए जाने पर उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर वापस लेने की मांग की थी। कांग्रेस भी किसानों के आंदोलन का लगातार समर्थन कर रही है। पिछले दिनों प्रदेश कांग्रेस ने कांग्रेस मुख्यालय से राजभवन तक पैदल मार्च कर तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग की थी। कांग्रेस किसान आंदोलन के लिए मदद जुटाने के लिए गांवों में अभियान भी चला रही है।

प्रदेश भाजपा पर भी उठाए सवाल

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेश भाजपा के प्रस्तावित आंदोलन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि BJP की प्रदेश प्रभारी डी. पुरंदेश्वरी हंटर मार रही हैं, इसलिए यहां के भाजपा नेता आंदोलन कर रहे हैं। हकीकत यह है कि भाजपा के पास छत्तीसगढ़ में कोई मुद्दा नहीं बचा है। मुख्यमंत्री ने कहा, भाजपा प्रदेश के 60 लाख मीट्रिक टन चावल लेने के लिए आंदोलन करे तो अच्छा है। उन्होंने पूछा कि भाजपा नेताओं को बताना चाहिए कि क्या वे अपना धान खुली मंडियों में बेचना चाहेंगे।

अर्णव के वॉट्सएप चैट की जांच की मांग

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अर्णव गोस्वामी के वॉट्सएप चैट के खुलासों के आधार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, रक्षा मंत्री को इसका स्पष्टीकरण देना चाहिए कि बालाकोट एयर स्ट्राइक की सूचना, गोस्वामी तक कैसे पहुंची। उन्होंने पूरे मामले की जांच के लिए सर्वोच्च न्यायालय के जज की अध्यक्षता में कमेटी की मांग की है।

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