विश्व में स्टील मार्केट के ट्रेंड को बदल दिया, भारत में प्रोडक्ट डंप करता था चीन, अब भिलाई स्टील प्लांट से इंपोर्ट करने को मजबूर

विश्व में स्टील मार्केट के ट्रेंड को बदल दिया, भारत में प्रोडक्ट डंप करता था चीन, अब भिलाई स्टील प्लांट से इंपोर्ट करने को मजबूर

भिलाई. कोरोनावायरस ने विश्व में स्टील मार्केट के ट्रेंड को बदल दिया है। वायरस की चपेट में आने के पहले सबसे बड़ा स्टील उत्पादक चीन जहां अपने उत्पाद को सस्ते दामों में बेचने के साथ ही भारत में डंप कर रहा था, अब आयात करने को मजबूर है। लॉकडाउन के दौरान भिलाई स्टील प्लांट (बीएसपी) पहले फेज में 20 हजार टन सेमी प्रोडक्ट (कास्ट बिलेट) के साथ सप्लाई भी शुरू कर चुका है। चीन ने सेल को बड़ी मात्रा में सेफी और फिनिश्ड प्रोडक्ट की सप्लाई का ऑर्डर भी मिला है।

कोरोना की वजह से चीन का कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। उसके ज्यादातर स्टील प्लांट अस्थाई तौर पर बंद हैं या आधे से भी कम उत्पादन क्षमता के साथ ऑपरेट किए जा रहे हैं। यही स्थिति मिडिल ईस्ट, नेपाल, दक्षिण पूर्व एशिया के देशों के स्टील प्लांट्स की है। चीन अब तक भारत में एंटी डंपिंग टैक्स के बाद भी अपने उत्पाद का बड़ी मात्रा में एक्सपोर्ट कर रहा था, उसे अब भारत से सेमी और फिनिश्ड प्रोडक्ट का आयात करना पड़ रहा है।

बीएसपी ने शुरू की अप्रैल से सप्लाई 
चीन से मिल ऑर्डर में कास्ट बिलेट भी शामिल है। जिसका उत्पादन बीएसपी के स्टील मेल्टिंग शॉप-3 (एसएमएस) में किया जा रहा है। अप्रैल में करीब 8500 टन कास्ट बिलेट चीन को सप्लाई किया गया था। इस महीने अब तक करीब साढ़े 12 हजार टन बिलेट की सप्लाई की जा चुकी है।

एसएमएस-3 के बिलेट की भारी डिमांड
एसएमएस-3 में बनने वाले कास्ट बिलेट की न केवल देशभर में, बल्कि विदेशों में भी भारी डिमांड है। इसकी वजह उसका स्पेशल साइज है जो 150 वर्ग मीटर है। इस साइज के बिलेट का बीएसपी एक्सक्लूसिव उत्पादन कर रहा है। प्लांट में एसएमएस-3 में बनने वाले ब्लूम का उपयोग रेलपांत उत्पादन और बिलेट का उपयोग बार एंड रॉड के उत्पादन में किया जा रहा है।

पहले चीन इसलिए कर रहा था अपने उत्पाद डंप
चीन विश्व में सबसे अधिक 928.3 एमटी प्रति वर्ष स्टील का उत्पादन करता है। उसके स्टील प्रॉडक्ट की लागत भारत के मुकाबले 20 से 30 फीसदी तक कम है। यही वजह है कि ट्रांसपोर्ट का खर्च जोड़ने के बाद भी दाम भारत के स्टील प्रॉडक्ट से कम होते हैं। जिसके कारण देश में चीन के इस्पात उत्पादों की काफी डिमांड है। इसे हतोत्साहित करने केंद्र ने एंटी डंपिंग टैक्स भी लगा चुका है, इसका भी खास असर नहीं हुआ लेकिन कोविड-19 के बाद स्थिति बदल गई है।