चैंबर ऑफ़ कॉमर्स में एक माह में चुनाव करने की कवायद शुरू

चैंबर ऑफ़ कॉमर्स में एक माह में चुनाव करने की कवायद शुरू

रायपुर (एजेंसी) | प्रदेश के सबसे बड़े कारोबारी संगठन छत्तीसगढ़ चैंबर के ताकतवर एकता पैनल में गुटों के झगड़े के बाद अब एक गुट ने कोर कमेटी पर दबाव बढ़ाते हुए एक माह के भीतर नए चुनाव का मुद्दा उठाया है। इस वर्ग का कहना है कि चैंबर के संविधान में अगर वरिष्ठ उपाध्यक्ष को कार्यवाहक अध्यक्ष बनाने की बात है तो यह उल्लेख भी है कि ऐसी दशा में एक माह के भीतर चुनाव करवाना होगा। इसकी लॉबिंग शुरू कर दी गई है। उधर, एक वर्ग ने अध्यक्ष जितेंद्र बरलोटा का इस्तीफा स्वीकार करने का दबाव भी बढ़ा दिया है।




चैंबर के वरिष्ठ संरक्षक इस बात की पड़ताल कर रहे हैं कि केवल अध्यक्ष का चुनाव कराना होगा या फिर सभी पदों पर। संस्थापक सदस्यों का दावा है कि केवल अध्यक्ष का चुनाव होगा, बाकी चुने हुए लोग वैसे ही काम करेंगे। बरलोटा का इस्तीफा मंजूर करने के साथ ही सभी नियुक्तियां भी खत्म हो जाएंगी। इस वजह से बड़े कारोबारी नेता इस मामले को लंबित रखना चाहते हैं। जितनी देर इस्तीफा मंजूर करने में होगी उतने ही समय तक चैंबर के मनोनीत पदाधिकारी बने रहेंगे। जिन्हें मनोनीत किया गया है उनमें से अधिकतर भाजपा के बड़े नेताओं के समर्थक हैं। ऐसे में विधानसभा चुनाव तक इसकी आंच जा सकती है। इस बीच, चैंबर के चेयरमैन योगेश अग्रवाल ने संविधान के अनुसार एक महीने में नया अध्यक्ष चुनने के लिए चुनाव कराने की मांग की है। उनका कहना है कि संवैधानिक नियमों से वरिष्ठ उपाध्यक्ष को कार्यवाहक अध्यक्ष बनाया गया है, लेकिन एक महीने के भीतर चुनाव भी करवाना होगा।

टी-शर्ट खरीदी का मामला तेज

चैंबर के एक गुट ने कोषाध्यक्ष प्रकाश अग्रवाल पर 80 हजार की टी-शर्ट खरीदी में गड़बड़ी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि युवा चैंबर को बिना किसी खास वजह से टी-शर्ट बांट दी गई। इस पर सफाई देते हुए कोषाध्यक्ष ने बरलोटा को इसका जिम्मेदार ठहराया और कहा कि उन्हीं की सहमति से टी-शर्ट खरीदी के लिए 80 हजार दिए गए। युवा चैंबर ने 1511 आजीवन सदस्य बनाए, जिससे 52 लाख रुपए सदस्यता शुल्क के रूप मिले। टी-शर्ट उसी का ईनाम था।

कोषाध्यक्ष की चेतावनी – सभी का कच्चा चिट्ठा है, खोल दूंगा

वही चैंबर के कोषाध्यक्ष ने अपने ऊपर लगे आरोपों से खिन्न होकर अपने ही पैनल के पदाधिकारियों को चेतावनी दी है कि आरोप लगाने वाले सभी लोगों का कच्चा-चिट्ठा उनके पास है। वे जब चाहेंगे, इसे खोल देंगे और प्रमाण के साथ बताएंगे कि चैंबर में कितने रुपयों का फर्जीवाड़ा किन लोगों ने किया, किनके फर्जी बिल का जमकर भुगतान हुआ है। अपनी चेतावनी में उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन यह साफ हो गया है कि वे उपाध्यक्ष राजेंद्र जग्गी को निशाना बना रहे हैं। क्योंकि उनका सबसे ज्यादा विरोध अभी वे ही कर रहे हैं। जग्गी बरसों तक चैंबर में व्यापार मेले के प्रभारी रह चुके हैं।



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