डायल 104 पर भोजन के लिए कॉल करो, जवाब मिलता है- सरपंच से मदद लें, मेडिकल हेल्प के लिए पुलिस का नंबर दे दिया जाता

डायल 104 पर भोजन के लिए कॉल करो, जवाब मिलता है- सरपंच से मदद लें, मेडिकल हेल्प के लिए पुलिस का नंबर दे दिया जाता

दुर्ग. कोरोना संकट के बीच मदद के लिए बनी हेल्पलाइन डायल 104 औपचारिकता बनकर रह गया है। भोजन से संबंधित दिक्कत आने पर कोई डायल 104 पर कॉल करता है तो उसे सहायता उपलब्ध कराने के लिए अपने क्षेत्र के पार्षद या सरपंच से संपर्क करने के लिए कहा जाता है। इसी तरह चिकित्सकीय सुविधा के लिए भी उन्हें पुलिस या एंबुलेंस का नंबर थमा दिया जा रहा है।

भूखे बच्चों की मदद की जगह पार्षद से संपर्क करने को कहा
मॉडल टाउन स्मृति नगर में रहने वाला चित्रांश तिवारी आश्रम के असहाय बच्चों के लिए भोजन से लेकर चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराते हैं। लॉकडाउन की वजह से रायपुर में फंस गए। आश्रम में राशन खत्म होने पर भोजन का संकट आ गया। चित्रांश ने डायल 104 से मदद की गुहार लगाई। इस पर उसे दो नंबर दिए गए। वहां से सहायता नहीं मिलने पर दोबारा कॉल किया तो पार्षद से संपर्क करने कहा।

बीमार महिला की मदद की जगह सांसद हेल्पलाइन का थमा दिया
पिछले हफ्ते पहले खांसी और जुकाम से पीड़ित विक्षिप्त महिला को बीमार अवस्था में घूम रही थी। लोगों को भोजन सामग्री उपलब्ध कराने वाली संस्था के रंजीत और संदीप ने महिला को देखकर उसे चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने के मकसद के लिए इस इमरजेंसी नंबर पर कॉल किया। महिला के लिए हॉस्पिटल पहुंचाने की व्यवस्था करने की जगह दोनों को सांसद हेल्पलाइन का नंबर थमा दिया। समस्या के

निराकरण का फॉलोअप नहीं
कोरोना संकट में लोगों को मदद के लिए भटकना नहीं पड़े। इसके लिए प्रशासन ने हेल्पलाइन नंबर जारी किया, लेकिन कॉलर को वाजिब सहायता मुहैया कराने की जगह संबंधित विभाग के अधिकारियों के नंबर थाम दिए जाते हैं। इसके बाद उसे मदद मिली या नहीं। इसका भी फीडबैक नहीं लिया जाता है। लॉकडाउन लागू होने के बाद शासन ने हेल्पलाइन नंबर 104 जारी किया था। इस पर 24 घंटे और सातों दिन सुविधा देने का दावा भी किया गया।