महापौर के अप्रत्यक्ष चुनाव के खिलाफ याचिका पर सुनवाई शुरु, हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

महापौर के अप्रत्यक्ष चुनाव के खिलाफ याचिका पर सुनवाई शुरु, हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

बिलासपुर | छत्तीसगढ़ में होने वाले महापौर चुनाव को लेकर बिलासपुर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सोमवार को कोर्ट से इस मुद्दे से जुड़ी जनहित याचिकाओं पर चर्चा की। मामले में सुनवाई के बाद कोर्ट ने राज्य शासन व चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब मांगा है। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस पीआर रामचंद्र मेनन व जस्टिस पीपी साहू के युगलपीठ में हुई।

शासन के जवाब के बाद मामले की अगली सुनवाई 28 नवंबर को होगी। दरअसल राज्य सरकार ने अक्टूबर के महीने में अधिसूचना जारी की थी। इसमें फैसला लिया गया था कि महापौर को आम जनता नहीं बल्कि चुनकर आए पार्षदों द्वारा चुना जाएगा। इस फैसले का विपक्षी दल विरोध करते रहे।

भारतीय जनता पार्टी के  अशोक चावलानी, रुपेश सोनी, जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के विधायक धर्मजीत सिंह और एवेज देवांगन ने अधिवक्ता आशुतोष पांडेय,एवी श्रीधर, रोहित शर्मा व प्रतीक शर्मा के माध्यम से उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। इसी मामले में पहली सुनवाई सोमवार को हुई। इसमें तर्क दिया गया कि इसमें महापौर के चुनाव में आम जन को चुनावी अधिकार से वंचित किया जा रहा है। खरीद फरोख्त होगी, इससे लोकतंत्र प्रदूषित होगा।