19 अप्रैल से दूरदर्शन पर ‘रामायण’ की जगह टेलीकास्ट होगा ‘उत्तर रामायण’, श्रीकृष्णा की वापसी की भी तैयारी

19 अप्रैल से दूरदर्शन पर ‘रामायण’ की जगह टेलीकास्ट होगा ‘उत्तर रामायण’, श्रीकृष्णा की वापसी की भी तैयारी

मुंबई. लॉकडाउन के बीच जनता की मांग पर शुरू हुए ‘रामायण’ की सफलता के बाद दूरदर्शन अब ‘लव कुश’ का पुनः प्रसारण करने जा रहा है, जिसे मूलरूप से ‘उत्तर रामायण’ के नाम से जाना जाता है। हालांकि, 19 अप्रैल से इसे सिर्फ रात 9 बजे के स्लॉट में टेलीकास्ट दिखाया जाएगा, जबकि सुबह 9 बजे के स्लॉट में रात वाले एपिसोड का ही रिपीट टेलीकास्ट होगा। इस बात की जानकारी प्रसार भारती के सीईओ शशि शेखर ने ट्विटर पर दी। उन्होंने इस बात के संकेत भी दिए हैं कि आने वाले समय में 90 के दशक के पॉपुलर शो ‘श्रीकृष्णा’ का पुनः प्रसारण भी किया जा सकता है।

शशि ने अपने ट्वीट में लिखा है, “कई राज्यों में सुबह दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो के माध्यम से एजुकेशन क्लासेस शुरू कर दी गई हैं। इसे देखते हुए ‘उत्तर रामायण’ के फ्रेश एपिसोड रात 9 बजे के स्लॉट में ही दिखाए जाएंगे, जिनका रिपीट टेलीकास्ट सुबह 9 बजे के स्लॉट में किया जाएगा।”

रविवार से शुरू हो रही नई व्यवस्था
शशि ने अपने अगले ट्वीट में लिखा है, “रविवार सुबह 9 बजे युद्ध कांड की मुख्य कहानी के फिनाले का रिपीट टेलीकास्ट किया जाएगा। रविवार रात 9 बजे से उत्तरकांड से संबंधित एपिसोड, जो उत्तर रामायण के रूप में निर्मित किए गए हैं, का प्रसारण होने लगेगा।”

शनिवार को मूल ‘रामायण’ का समापन
शशि ने एक अन्य ट्वीट में लिखा है, “कल यानी शनिवार सुबह और रात के 9 बजे रामायण के युद्ध कांड के बचे हुए एपिसोड टेलीकास्ट किए जाएंगे, ताकि उत्तरकांड की शुरुआत से पहले मुख्य स्टोरीलाइन का समापन हो सके।” गौरतलब है कि रामानंद सागर के शो ‘रामायण’ की सबसे पहले शुरुआत 1987 में हुई थी। इसका पुनः प्रसारण 28 मार्च 2020 से हुआ था और पांच साल का रिकॉर्ड तोड़ते हुए यह टीवी पर सबसे ज्यादा देखा जाने वाला शो बन गया।


श्रीकृष्णा पर भी चल रहा है काम

शशि शेखर को टैग करते हुए जब एक ट्विटर यूजर ने उनसे श्रीकृष्णा के पुनः प्रसारण की अपील की तो उन्होंने जवाब में लिखा, “हम इस पर काम कर रहे हैं। जल्दी ही आपको अपडेट देंगे। देखते रहिए।” 221 एपिसोड वाला ‘श्रीकृष्णा’ सबसे पहले 1993 से 1996 के बीच टेलीकास्ट किया गया था। इसके लेखक, निर्देशक और निर्माता रामानंद सागर ही थे।