Home ज्योतिष पूर्वजो की आत्मा को मिलेगी शांति श्राद्ध कर्म करते वक़्त ध्यान रखने ये ख़ास बाते

पूर्वजो की आत्मा को मिलेगी शांति श्राद्ध कर्म करते वक़्त ध्यान रखने ये ख़ास बाते

पूर्वजो की आत्मा को मिलेगी शांति श्राद्ध कर्म करते वक़्त ध्यान रखने ये ख़ास बाते

ऐसी मान्यता है कि पितृ पक्ष में मृत पूर्वजों की आत्मा पितृ लोक से धरती पर आती है यदि हम श्राद्ध आदि विधि से उन्हें संतुष्ट कर देते हैं तो पितृ आशीर्वाद देते हैं इसलिए श्राद्ध पक्ष में पूर्ण विधि-विधान से श्राद्ध कर्म करना चाहिए श्राद्ध कर्म करते वक़्त हमें कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए श्राद्ध पक्ष शुरू हो चूका है और भाद्र पद शुक्ल पूर्णिमा से आश्विन कृष्ण अमावस्या तक का समय श्राद्ध पक्ष या पितृ पक्ष कहलाता हैं जिस तिथि को अपने पूर्वजों का देहांत होता है, श्राद्ध पक्ष की उसी तिथि को उनका श्राद्ध कर्म किया जाता है।

कहां श्राद्ध करना चाहिये?

#दूसरे के घर रहकर श्राद्ध न करें। मज़बूरी हो तो किराया देकर निवास करें।
#वन, पर्वत, पुण्यतीर्थ और मंदिर दूसरे की भूमि नहीं इसलिये यहां श्राद्ध करें।
#श्राद्ध में कुशा के प्रयोग से, श्राद्ध राक्षसों की दृष्टि से बच जाता है।
#तुलसी चढ़ाकर पिंड की पूजा करने से पितृ प्रलयकाल तक प्रसन्न रहते हैं।
#तुलसी चढ़ाने से पितृ, गरूड़ पर सवार होकर विष्णु लोक चले जाते हैं।





श्राद्ध के भोजन में क्या न पकायें?

#चना, मसूर, उड़द, कुलथी, सत्तू, मूली, काला जीरा
#कचनार, खीरा, काला उड़द, काला नमक, लौकी
#बड़ी सरसों, काले सरसों की पत्ती और बासी
#खराब अन्न, फल और मेवे

श्राद्ध के लिये योग्य कौन?

#पिता का श्राद्ध पुत्र करता है। पुत्र के न होने पर, पत्नी को श्राद्ध करना चाहिये।
#पत्नी न होने पर, सगा भाई श्राद्ध कर सकता है।
#एक से ज्य़ादा पुत्र होने पर, बड़े पुत्र को श्राद्ध करना चाहिये।
#श्राद्ध कब न करें?
#कभी भी रात में श्राद्ध न करें, क्योंकि रात्रि राक्षसी का समय है।
#दोनों संध्याओं के समय भी श्राद्धकर्म नहीं किया जाता है।





श्राद्ध के लिये दोपहर का कुतुप और रौहिण मुहूर्त श्रेष्ठ है।
कुतुप मुहूर्त दोपहर 11:36AM से 12:24PM तक। (2018)
रौहिण मुहूर्त दोपहर 12:24PM से दिन में 1:15PM तक। (2018)
कुतप काल में किये गये दान का अक्षय फल मिलता है।
पूर्वजों का तर्पण, हर पूर्णिमा और अमावस्या पर करें।
इन संकेतों से पता चलता है की आप पर है पितरों की कृपा

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