Home ज्योतिष जानिए यहां चमगादड़ की इस वजह से होती है पूजा

जानिए यहां चमगादड़ की इस वजह से होती है पूजा

जानिए यहां चमगादड़ की इस वजह से होती है पूजा

यहां चमगादड़ कब से है इस की सही जानकारी किसी को नहीं है सरसई पंचायत के सरपंच और प्रदेश सरपंच संघ के अध्यक्ष अमोद कुमार निराला आईएएनएस को बताते हैं कि गांव के एक प्राचीन तालाब (सरोवर) के पास लगे पीपल, सेमर तथा बथुआ के पे़डों पर ये चमगाद़ड बसेरा बना चुके हैं।




रात में गांव के बाहर किसी भी व्यक्ति के तालाब के पास जाने के बाद ये चमगाद़ड चिल्लाने लगते हैं, जबकि गांव का कोई भी व्यक्ति जाने के बाद चमगाद़ड कुछ नहीं करते उन्होंने दावा किया कि यहां कुछ चमगाद़डों का वजन पांच किलोग्राम तक है गांव के लोग न केवल इनकी पूजा करते हैं, बल्कि इन चमगाद़डों की सुरक्षा भी करते हैं

ग्रामीणों का शुभ कार्य इन चमगाद़डों की पूजा के बगैर पूरा नहीं माना जाता जनश्रुतियों के मुताबिक, मध्यकाल में वैशाली में महामारी फैली थी, जिस कारण ब़डी संख्या में लोगों की जान गई थी इसी दौरान ब़डी संख्या में यहां चमगाद़ड आए और फिर ये यहीं के होकर रह गए इसके बाद से यहां किसी प्रकार की महामारी कभी नहीं आई।




बिहार के वैशाली जिले के राजापाकर प्रखंड के सरसई (रामपुर रत्नाकर) गांव में चमगादडों की न केवल पूजा होती है, बल्कि लोग मानते हैं कि चमगाद़ड उनकी रक्षा भी करते हैं इन चमगादडों को देखने के लिए पर्यटकों की भी़ड़ लगी रहती है यहां लोगों की मान्यता है कि चमगाद़ड समृद्धि की प्रतीक देवी लक्ष्मी के समान हैं।

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