Home लाइफस्टाइल सांस की बीमारी से ये खतरा है की लकड़ियों या कोयले से खाना पकाने से बढ़ जाता है

सांस की बीमारी से ये खतरा है की लकड़ियों या कोयले से खाना पकाने से बढ़ जाता है

सांस की बीमारी से ये खतरा है की लकड़ियों या कोयले से खाना पकाने से बढ़ जाता है


ऐसे परिवार कम और मध्यम आय वाले देशों के ग्रामीण क्षेत्रों में होते हैं वैसे चीन में तेजी से शहरीकरण हो रहा है लेकिन उसकी एक तिहाई जनसंख्या अब भी ठोस ईंधनों पर निर्भर है ब्रिटेन के ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और चाइनीज एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज के अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि खाना पकाने के लिए बिजली या गैस का इस्तेमाल करने वालों की तुलना में लकड़ी या कोयला का इस्तेमाल करने वालों में पुरानी और गंभीर सांस संबंधी बीमारी से अस्पताल में भर्ती या मौत के मामले 36 फीसदी ज्यादा हैं।

केयर मेडिसिन में प्रकाशित आलेख के अनुसार लोग ठोस ईंधन का जितने अधिक समय तक इस्तेमाल करते हैं, उनके सांस संबंधी बीमारी के कारण अस्पताल में भर्ती होने या मौत होने का खतरा गैस या बिजली से खाना पकाने वालों की तुलना में उतना ही बढ़ जाता है।




एक अध्ययन में पाया गया है कि भारत जैसे कम आय वाले देशों में खाना पकाने के लिए लकड़ियां या कोयला चलाने के चलन से श्वसन रोगों के कारण अस्पताल में भर्ती होने या जान चले जाने का जोखिम बढ़ सकता है अनुसंधान कर्ताओं के अनुसार दुनियाभर में करीब तीन अरब लोग ऐसे परिवारों में रहते हैं जहां खाना पकाने के लिए नियमित रूप से लकड़ियां, कोयला या अन्य ठोस ईंधन जलाए जाते हैं ठोस ईंधन जलने पर भारी मात्रा में प्रदूषक खासकर ऐसे कण छोड़ते हैं जो हमारे फ़ेफड़ों में अंदर तक चले जाते हैं।




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